आज का स्वार्थी इंसान

आज का स्वार्थी इंसान 

मतलब की दुनिया है यारों ,मतलब के हैं यार । 
सबसे बड़ा है इस जीवन में माता का किरदार । 

भेज दिया वृद्धाश्रम जिसने तुझको जन्म दिया था,
भूल के अपनी पीड़ा उसने तुझसे प्यार किया था ,
इश्क़ मुहोब्बत झूठा है सब सच्चा माँ का प्यार ,
मतलब की दुनिया है यारों ,मतलब के हैं यार । 

कंधे पर बैठाकर जो मेल घूमाकर लाते ,
कोपी ,कलम, किताब ,खिलौने सब हमको दिलवाते ,
और बोझ उठा नहीं सकते हम उनका ,बन गए "बीवी" के "आज्ञाकार "
मतलब की दुनिया है यारों ,मतलब के हैं यार । 

नारी की चिंता है सबको , सब नारी-नारी चिल्लाते ,
हो रहा हो लक्ष्मी का आगमन अगर घर में , "भ्रूणहत्या "भी ये करवाते ,
न रहा माँ का आदर अब घर में ,भूल गए ये बहनो का भी प्यार ,
मतलब की दुनिया है यारों ,मतलब के हैं यार । 

नेताओं का तांडव है ,वो देखें और हम सब नाचें ,
धर्म के सौदागर हैं! कहीं कुरान! कहीं बाइबल! तो कहीं भगवद गीता बाचें!
 चुनाव के नाम पर करते हैं ये मुजरों का प्रचार ,
मतलब की दुनिया है यारों ,मतलब के हैं यार । 

कलयुग की रामायण है ,यहाँ रावण सेना जीती ,
सच्चाई लिखता हूँ यारों ,ना कोई आपबीती !
इस कलयुगी दुनिया में सबके "गांधी" पालनहार ,
जिसकी जेब में गांधी यारों ,उनकी है सरकार । 
मतलब की दुनिया है यारों ,मतलब के हैं यार ।
शान (उर्फ़ सुभम )की कलम से । 

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